अजित पवार “दादा” का विमान सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ा विमान, 35 मिनट बाद बारामती के रनवे से टकराया और सब कुछ ख़त्म हो गया। छह बार उपमुख्यमंत्री रहे नेता की महत्वाकांक्षा, विवाद और विरासत सभी एक ही पल में इतिहास बन गए।

Ajit Pawar Maharashtra Deputy CM Of Maharashtra Death : 28 जनवरी 2026 की सुबह, महाराष्ट्र की राजनीति का एक अध्याय अचानक और त्रासद तरीके से समाप्त हो गया। राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित अनंतराव पवार एक निजी चार्टर्ड विमान दुर्घटना में 66 वर्ष की आयु में मारे गए। उनके साथ विमान में सवार चार अन्य लोगों ने भी अपनी जान गंवाई।
अजित “दादा” पवार महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ और प्रभावशाली राजनेता थे, जिनका राजनीतिक जीवन चार दशकों से अधिक समय तक महाराष्ट्र के राजनीतिक नक्शे पर छाया रहा। वे अपनी मजबूत प्रशासकीय क्षमता, राजनीतिक रणनीति और बारामती क्षेत्र में गहरी जड़ें रखने के लिए जाने जाते थे।
उनकी मृत्यु ने न केवल उनके परिवार को सदमे में डाल दिया, बल्कि महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में एक शक्तिशाली व्यक्तित्व के अचानक चले जाने से उत्पन्न एक राजनीतिक शून्य भी पैदा कर दिया।
विमान हादसे का क्रमबद्ध विवरण
Ajit Pawar Flight Accident Today
यह त्रासदी बुधवार सुबह तेजी से घटित हुई। अजित पवार स्थानीय निकाय चुनाव के लिए रैलियों में भाग लेने मुंबई से अपने गढ़ बारामती जा रहे थे।
| समय | घटना | स्थान / विवरण |
|---|---|---|
| सुबह 8:10 बजे | विमान ने उड़ान भरी | मुंबई का छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा |
| सुबह 8:45 बजे के आसपास | विमान रडार से गायब हुआ | बारामती हवाई अड्डे के पास, लैंडिंग के दौरान |
| सुबह 8:48 बजे | विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ | रनवे के निकट; विमान में आग लग गई और सभी पांच लोगों की मौत |
विमान वीएसआर एविएशन का चार्टर्ड लर्जेट 45 एक्सआर (रजिस्ट्रेशन VT-SSK) था। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, पायलट ने पहली बार लैंडिंग का प्रयास छोड़ दिया था और दूसरे प्रयास के दौरान विमान का नियंत्रण खो गया। दुर्घटनास्थल के एक चश्मदीद ने बताया, “जब विमान नीचे आया, तो लगा कि यह दुर्घटनाग्रस्त होगा और ऐसा ही हुआ। यह फिर फट गया और एक भीषण आग में बदल गया।” उन्होंने आगे कहा कि विमान रनवे से पहले ही लगभग 100 फीट नीचे गिर गया।
दुर्घटना से जुड़े कुछ अहम तथ्य:
Ajit Pawar Baramati Plane Crash
- विमान संचालक: वीएसआर एविएशन, दिल्ली स्थित एक निजी जेट चार्टर ऑपरेटर।
- पिछला रिकॉर्ड: यह वीएसआर वेंचर्स के स्वामित्व वाले जेट से जुड़ी पिछले ढाई वर्षों में दूसरी दुर्घटना है। 14 सितंबर 2023 को कंपनी के एक अन्य लर्जेट 45 एक्सआर (VT-DBL) ने मुंबई हवाई अड्डे पर हार्ड लैंडिंग की थी, हालांकि उस दुर्घटना में किसी की मृत्यु नहीं हुई थी।
- जांच: विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) इस गंभीर दुर्घटना की जांच करेगा।
बारामती से मंत्रालय तक: अजित पवार का राजनीतिक सफर
Who is Ajit Pawar
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को पश्चिमी महाराष्ट्र के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार में हुआ था। वह दिग्गज नेता शरद पवार के भतीजे थे और उनकी छत्रछाया में राजनीति में आए। उनका राजनीतिक सफर महाराष्ट्र के सहकारी आंदोलन से शुरू हुआ, जो उनकी पार्टी के लिए एक पारंपरिक शक्ति का केंद्र रहा है।
राजनीतिक जीवन के प्रमुख पड़ाव:
| वर्ष | घटना / उपलब्धि | महत्व |
|---|---|---|
| 1982 | सहकारी चीनी मिल के बोर्ड में चुने गए | सहकारी क्षेत्र में पदार्पण; किसानों और ग्रामीण समुदायों से जुड़ाव की शुरुआत |
| 1991 | बारामती से पहली बार विधान सभा के लिए चुने गए | चुनावी राजनीति में आगमन; 2024 तक सात लगातार बार इसी सीट से विजयी रहे |
| 1999-2014 | जल संसाधन मंत्री रहे | इस दौरान महाराष्ट्र सिंचाई घोटाले के आरोपों का सामना किया |
| 2013 | सूखे पर विवादास्पद टिप्पणी के लिए माफी मांगी | “क्या हम पेशाब करके बांध भर दें?” जैसे बयान से आलोचना झेलनी पड़ी |
| नवंबर 2019 | देवेंद्र फड़नविस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली | एनसीपी से पहला बड़ा विभाजन; सरकार मात्र 80 घंटे चली |
| जुलाई 2023 | एनसीपी के बहुमत के साथ भाजपा-शिव सेना गठबंधन में शामिल हुए | अपने चाचा शरद पवार से स्पष्ट विभाजन; एनसीपी का दो हिस्सों में बंटना |
| फरवरी 2024 | चुनाव आयोग ने अजित पवार के गुट को ही वास्तविक एनसीपी माना | पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न (घड़ी) अजित पवार के गुट को मिला |
अजित पवार ने छह अलग-अलग अवसरों पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और इस पद पर सबसे लंबे समय तक (गैर-लगातार) सेवा देने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फड़नविस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे जैसे विभिन्न दलों के मुख्यमंत्रियों के अधीन काम किया। वित्त, जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
राष्ट्रीय शोक: नेताओं ने जताया दुख
अजित पवार की अचानक मृत्यु की खबर ने पूरे देश में शोक की लहर दौड़ा दी। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेताओं तक सभी ने दुख व्यक्त किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: “महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री अजित पवार जी सहित कई लोगों की बारामती, महाराष्ट्र में विमान दुर्घटना में मृत्यु का समाचार अत्यंत दुःखद है। अजित पवार जी का असामयिक निधन एक अपूरणीय क्षति है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: “श्री अजित पवार जी जनता के नेता थे जिनकी जमीन से गहरी जुड़ाव था… उनका असामयिक निधन अत्यंत सदमे और दुःख भरा है।”
गृह मंत्री अमित शाह: “आज महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री व हमारे वरिष्ठ एनडीए सहयोगी अजित पवार जी का दुखद दुर्घटना में निधन का समाचार मुझे गहरे दुःख में डाल गया है।”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नविस: “उन जैसे नेता को खो देना एक अभूतपूर्व क्षति है। व्यक्तिगत जीवन में वह एक अच्छे दोस्त थे। हमने कई चुनौतियों का सामना एक साथ किया।”
विपक्ष के नेता राहुल गांधी: “महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री अजित पवार जी व उनके सहयात्रियों का आज एक विमान दुर्घटना में निधन का समाचार अत्यंत हृदयविदारक है।”
🔹 व्यक्तिगत जीवन
Ajit Pawar Family Tree
- अजीत पवार पत्नि सुनेत्रा पवार से विवाहित थे और उनके दो बेटे हैं – पार्थ और जय पवार ।
- उन्होंने अपने जीवन भर ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में जनहित कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
एक जटिल विरासत: शक्ति, विवाद और एक अधूरा सपना
अजित पवार की राजनीतिक विरासत जटिल और बहुआयामी है। उन्हें एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी वित्त मंत्री के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने राज्य की आर्थिक नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहकारी क्षेत्र में उनकी 16 वर्षों की पकड़ (पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में) ने उन्हें महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति में एक अडिग स्तंभ बना दिया था।
हालांकि, उनका करियर विवादों से भी घिरा रहा। महाराष्ट्र सिंचाई घोटाले के आरोपों और 2013 के सूखे पर उनके संवेदनहीन बयान ने उनकी छवि को धक्का पहुंचाया। 2023 में अपने चाचा और राजनीतिक गुरु शरद पवार की पार्टी से अलग होकर सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने का उनका निर्णायक कदम उनके साहसिक और अवसरवादी राजनीतिक स्वभाव को दर्शाता है।
उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि छह बार उपमुख्यमंत्री रहने के बावजूद मुख्यमंत्री पद का उनका सपना अधूरा रह गया।
उनकी मृत्यु से न केवल महाराष्ट्र की राजनीति में एक शक्तिशाली धुरी का अंत हुआ है, बल्कि पवार परिवार और एनसीपी के भविष्य पर भी गहरा प्रश्नचिह्न लग गया है। बारामती का यह ‘साहब’ अब नहीं रहा, लेकिन महाराष्ट्र की जमीनी राजनीति और सहकारी आंदोलन पर उनकी छाप लंबे समय तक बनी रहेगी।
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